Choli Ke Peeche Kya Hai Controversy: ‘खलनायक’ के इस चर्चित गाने को Doordarshan और All India Radio ने किया था बैन, जानिए क्यों मचा था बवालबॉलीवूड में कई ऐसे गाने बने हैं जो एक तरफ सुपरहिट रहे तो दूसरी तरफ विवादों में भी घिरे। 1993 में आई फिल्म ‘खलनायक’ का गाना ‘चोली के पीछे क्या है…’ भी कुछ ऐसा ही था। माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया यह गाना चार्टबस्टर हिट तो बना, लेकिन इसके बोलों को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया कि मामला कोर्ट तक जा पहुंचा।

Choli Ke Peeche Kya Hai Controversy: क्यों मचा था बवाल?
90 के दशक की शुरुआत में जब ‘चोली के पीछे क्या है’ गाना रिलीज हुआ, तो समाज के कुछ वर्गों ने इसके बोलों को लेकर आपत्ति जताई। आलोचकों का कहना था कि गाने के बोल भद्दे और महिलाओं के खिलाफ हैं। उस दौर में, जब भारतीय सिनेमा अभी भी परंपरागत मूल्यों से जुड़ा हुआ था, इस तरह के सीधे सवाल को कई लोगों ने अश्लील करार दे दिया।
सामाजिक संगठनो और महिला संगठनों ने इस गाने का विरोध किया। उनका मानना था कि यह गाना महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है और समाज में गलत संदेश देता है। विरोध इतना तीखा हो गया कि दूरदर्शन (Doordarshan) और ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio) ने इस गाने पर प्रतिबंध लगा दिया।
बैन लगने के बावजूद बढ़ी लोकप्रियता
दिलचस्प बात यह है कि बैन लगने के बावजूद यह गाना जनता के बीच सुपरहिट रहा। अनुपम खेर, संजय दत्त और माधुरी दीक्षित स्टारर फिल्म ‘खलनायक’ के इस आइटम नंबर ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया। अलका याग्निक और इला अरुण की आवाज में गाया गया यह गाना लोगों की जुबान पर चढ़ गया।माधुरी दीक्षित के ठुमकों और इस कैची धुन ने ऐसा जादू चलाया कि बैन के बावजूद गाना हर शादी-पार्टी में बजने लगा। कैसेट्स की बिक्री आसमान छूने लगी और यह फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन गया।
कोर्ट में पहुंचा मामला
जब विवाद ज्यादा बढ़ गया तो मामला अदालत में पहुंच गया। फिल्म निर्माताओं को कोर्ट में सफाई देनी पड़ी। गीतकार आनंद बक्शी और फिल्म के निर्माताओं ने अपना पक्ष रखा कि गाने में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि गाने में कोई भी चीज अश्लील या महिलाओं के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह एक पारंपरिक लोक गीत की शैली में लिखा गया गाना है, जो राजस्थानी संस्कृति से प्रेरित है। असल में ‘चोली’ शब्द राजस्थानी परिधान को संदर्भित करता है और गाने का कॉन्टेक्स्ट पूरी तरह से सांस्कृतिक है।
गाने की असली कहानी
दरअसल, यह गाना राजस्थानी लोक संस्कृति से प्रेरित था। राजस्थान में महिलाएं अपनी चोली (ब्लाउज) के अंदर छोटी-छोटी चीजें रखती थीं – जैसे पैसे, चिट्ठियां या छोटे तोहफे। यह एक सामान्य प्रथा थी। गाने में भी यही संदर्भ दिया गया था जहां नायिका कहती है कि चोली के पीछे उसका दिल है। लेकिन शहरी दर्शकों ने इसे अलग नजरिए से देखा और विवाद खड़ा हो गया। यह उस दौर की सोच का प्रतिबिंब था जब बॉलीवूड में खुलापन आने लगा था और परंपरागत मूल्यों और आधुनिकता के बीच टकराव होने लगा था।
बॉलीवूड के बदलते दौर का प्रतीक
चोली के पीछे क्या है’ विवाद ने बॉलीवूड में एक नई बहस शुरू की। यह गाना उस दौर का प्रतीक बन गया जब हिंदी सिनेमा पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर नए प्रयोग करने लगा था। इस घटना के बाद भी कई गाने विवादों में घिरे – जैसे ‘कांटा लगा’ या ‘शीला की जवानी’ – लेकिन समय के साथ दर्शकों की सोच भी बदली और ऐसे गानों को ज्यादा स्वीकार्यता मिलने लगी।
आज का परिदृश्य और निष्कर्ष
आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो यह विवाद अजीब लगता है। आज के दौर में बॉलीवूड में इससे कहीं ज्यादा बोल्ड गाने बनते हैं और किसी को आपत्ति नहीं होती। लेकिन 90 के दशक में यह एक बड़ा मुद्दा था जो समाज में बदलाव की शुरुआत का संकेत था।’चोली के पीछे क्या है’ आज भी पार्टियों में बजता है और लोग इस पर थिरकते हैं।
माधुरी दीक्षित का यह गाना उनके करियर के सबसे यादगार गानों में से एक है। समय ने साबित कर दिया कि कला को सेंसरशिप से नहीं रोका जा सकता, और अच्छा संगीत हमेशा अपनी जगह बना ही लेता है।यह विवाद हमें याद दिलाता है कि कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कितनी महत्वपूर्ण है, और कैसे समाज को खुले दिमाग से चीजों को देखना चाहिए।