पुरानी पेंशन योजना भारत में साल 2026 की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना OPS (Old Pension Scheme) को लेकर बहस तेज हो गई है। केंद्र और राज्य सरकारों के लाखों कर्मचारी आज भी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के बजाय OPS की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का साफ कहना है कि रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा केवल मार्केट-लिंक्ड सिस्टम पर नहीं छोड़ी जा सकती।
हालांकि वर्ष 2004 के बाद केंद्र सरकार और कई राज्यों ने OPS को समाप्त कर NPS लागू किया, लेकिन बीते कुछ वर्षों में कई राज्यों द्वारा OPS की वापसी ने इस बहस को और गहरा कर दिया है।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) क्या है?
Old Pension Scheme (OPS) एक ऐसी पेंशन व्यवस्था है जिसमें सरकारी कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है। यह पेंशन कर्मचारी के अंतिम वेतन और सेवा अवधि पर आधारित होती है। OPS की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कर्मचारी को जीवनभर निश्चित पेंशन मिलती है और इसके लिए किसी प्रकार का बाजार जोखिम नहीं होता।
- 1. गारंटीड पेंशनOPS के तहत कर्मचारी को अंतिम वेतन का लगभग 50% पेंशन के रूप में जीवनभर मिलता है।
- 2. महंगाई भत्ता (DA) का लाभOPS में पेंशन के साथ महंगाई भत्ता भी जुड़ा होता है, जिससे बढ़ती महंगाई का असर कम होता है।
- 3. बाजार जोखिम से मुक्तिNPS की तरह शेयर बाजार या बॉन्ड के उतार-चढ़ाव का OPS पर कोई असर नहीं पड़ता।
- 4. परिवार पेंशन की सुविधाकर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को भी पेंशन मिलती है, जिससे सामाजिक सुरक्षा बनी रहती है।
- 5. मानसिक और आर्थिक स्थिरतारिटायरमेंट के बाद निश्चित आय होने से कर्मचारी भविष्य को लेकर निश्चिंत रहते हैं।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से कर्मचारियों की नाराजगी क्यों?
NPS को एक मार्केट-लिंक्ड पेंशन सिस्टम माना जाता है, जिसमें पेंशन की राशि शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। यही कारण है कि कर्मचारी इसे लेकर असंतुष्ट हैं।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) NPS से जुड़ी प्रमुख चिंताएं:
- पेंशन की कोई गारंटी नहीं
- रिटायरमेंट के समय मिलने वाली राशि अनिश्चित महंगाई से सुरक्षा नहीं
- बुजुर्गावस्था में आर्थिक जोखिम
- कर्मचारियों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद बाजार के उतार-चढ़ाव को समझना या संभालना संभव नहीं होता
2026 में OPS को लेकर सरकार की चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है राजकोषीय बोझ। OPS में सरकार को रिटायर कर्मचारियों को आजीवन पेंशन देनी होती है, जिससे सरकारी खर्च बढ़ता है।हालांकि कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि सरकार को अपने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि केवल बजट घाटे को। (और राजनीतिक खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)
किन राज्यों ने OPS को फिर से लागू किया?
बीते वर्षों में कई राज्यों ने OPS को दोबारा लागू करने का फैसला किया है, जिनमें शामिल हैं: राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, झारखंडइन राज्यों के फैसले ने देशभर के कर्मचारियों में नई उम्मीद जगा दी है। इस news की पुष्टि NDTV से की गई है
निष्कर्ष (Conclusion)
पुरानी पेंशन योजना केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों सरकारी कर्मचारियों की सामाजिक और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। 2026 में OPS पर चल रही बहस यह साफ दिखाती है कि कर्मचारी गारंटीड और सुरक्षित भविष्य चाहते हैं।जब तक NPS में पेंशन की निश्चितता और महंगाई से सुरक्षा नहीं जोड़ी जाती, तब तक OPS की मांग कमजोर पड़ने वाली नहीं है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को कैसे संतुलित करती है।
FAQs: पुरानी पेंशन योजना (OPS) से जुड़े सवाल
Q1. पुरानी पेंशन योजना (OPS) क्या है?
OPS एक गारंटीड पेंशन योजना है, जिसमें रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को जीवनभर निश्चित पेंशन मिलती है।
Q2. OPS और NPS में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
OPS में पेंशन की गारंटी होती है, जबकि NPS बाजार पर आधारित होती है और इसमें जोखिम शामिल होता है।
Q3. क्या OPS सभी कर्मचारियों के लिए लागू है?
फिलहाल OPS केवल उन्हीं राज्यों में लागू है, जहां राज्य सरकारों ने इसे दोबारा शुरू किया है।
Q4. सरकार OPS से क्यों बचना चाहती है?
OPS से सरकार पर दीर्घकालिक वित्तीय बोझ बढ़ता है, यही इसकी सबसे बड़ी वजह है।
Q5. क्या भविष्य में OPS पूरे देश में लागू हो सकती है?
यह पूरी तरह सरकार की नीति और राजनीतिक निर्णयों पर निर्भर करता है, लेकिन मांग लगातार बढ़ रही है।