Tomato fever in children या टोमैटो फ्लू एक वायरल बीमारी है जो खासकर छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। इस बीमारी के बारे में कई भ्रामक खबरें आती रहती हैं। आइए समझते हैं कि आखिर टोमैटो फीवर क्या है और यह बच्चों के लिए कितनी खतरनाक है।

टोमैटो फीवर क्या है? (What is Tomato Fever)
टोमैटो फ्लू एक नई तरह की वायरल बीमारी है जिसका नाम इसके खास लक्षणों के कारण पड़ा है। बच्चों की स्किन पर टोमैटर जैसे लाल फफोले निकलते हैं, इसीलिए इसे टोमैटो फीवर कहा जाता है।डॉक्टरों के अनुसार यह Hand, Foot and Mouth Disease का एक रूप हो सकता है, जो कॉक्ससैकी वायरस की वजह से होता है। यह बीमारी मुख्यतः 5 साल से कम उम्र के बच्चों में देखी गई है।
बच्चों में टोमैटो फीवर के लक्षण (Tomato Fever Symptoms)
टोमैटो फ्लू के लक्षण चिकनगुनिया की तरह होते हैं। बच्चों में ये मुख्य लक्षण दिखाई देते हैं
Tomato Fever in Children शुरुआती लक्षण:-
- तेज बुखार जो 3-4 दिन तक रह सकता है
- शरीर पर लाल दाने और चकत्ते निकलना
- हाथ-पैर और जोड़ों में तेज दर्द
- बहुत थकान महसूस करना
गंभीर लक्षण:-
मुंह, जीभ और मसूड़ों में छाले होना- स्किन पर लाल फफोले जो बाद में बड़े होकर टोमैटर जैसे दिखते हैं- उल्टी और दस्त की समस्या- पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)- जोड़ों में सूजन
खतरे के संकेत:
अगर बच्चा मुंह के छालों की वजह से खाना-पीना बंद कर दे तो यह चिंता की बात है। इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
टोमैटो फीवर का इलाज (Tomato Fever Treatment)
फिलहाल टोमैटो फ्लू की कोई खास दवा उपलब्ध नहीं है। यह एक self-limiting बीमारी है मतलब यह अपने आप ठीक हो जाती है।
घरेलू इलाज:- बच्चे को पूरा आराम दें- खूब सारा पानी और तरल पदार्थ पिलाएं- बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह पर paracetamol दें- फफोलों की खुजली के लिए गुनगुने पानी से स्पंज करें डॉक्टर की सलाह:- बच्चे को दूसरे बच्चों से अलग रखें- छाले को खुजाने न दें- पौष्टिक खाना दें जैसे खिचड़ी, दलिया, उपमा- दवाई खुद से न दें, डॉक्टर से पूछकर ही दें
टोमैटो फीवर कितने दिन रहता है? आमतौर पर टोमैटो फ्लू एक हफ्ते से 10 दिन में ठीक हो जाता है। यह जानलेवा बीमारी नहीं है लेकिन सही देखभाल जरूरी है।
बच्चों में टोमैटो फीवर से बचाव (Prevention)
मुख्य सावधानियां:- संक्रमित बच्चे को घर पर रखें जब तक वह पूरी तरह ठीक न हो जाए- बच्चे के कपड़े, बर्तन और खिलौनों को अलग रखें- हाथ धोने की आदत डालें- भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें
घर में सफाई:- संक्रमित बच्चे की चीजों को साफ करते रहें- कपड़े और खिलौने शेयर न करने दें – कमरे में सफाई का खास ख्याल रखें- अन्य बच्चों से दूरी बनाकर रखें
टोमैटो फीवर कितना खतरनाक है? अच्छी बात यह है कि टोमैटो फ्लू जानलेवा नहीं है। ज्यादातर मामलों में बच्चे बिना किसी गंभीर समस्या के ठीक हो जाते हैं।
दुर्लभ परेशानियां: कभी-कभार यह मांसपेशियों में कमजोरी या दिमागी बुखार जैसी समस्या दे सकता है, लेकिन यह बहुत कम होता है।
भारत में टोमैटो फीवर का इतिहास
अब तक भारत में लगभग 100 बच्चे इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं, खासकर दक्षिण भारत में।
प्रभावित राज्य:-
- केरल: सबसे ज्यादा मामले यहां मिले
- तमिलनाडु: कई जिलों में फैला
- ओडिशा: कुछ मामले रिपोर्ट हुए
- हरियाणा: कम मामले देखने को मिलेकोल्लम में अकेले 172 मामले सामने आए थे जो चिंता का विषय था।
डॉक्टर से कब मिलें?
तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें अगर:-
- बुखार 3 दिन से ज्यादा रहे
- बच्चा बहुत कमजोर हो जाए
- सांस लेने में दिक्कत हो
- पानी की कमी के लक्षण दिखें
- खाना-पीना बिल्कुल बंद कर दे
टोमैटो फीवर vs अन्य बीमारियां
टोमैटो फ्लू के लक्षण डेंगू और चिकनगुनिया से मिलते-जुलते हैं, इसलिए सही जांच जरूरी है।
- डेंगू- खून में platelets कम हो जाते हैं-
- चिकनगुनिया- जोड़ों का दर्द ज्यादा होता है –
- Hand Foot Mouth Disease आमतौर पर कम गंभीर होता है
माता-पिता के लिए सलाह
- क्या करें:- घबराएं नहीं, शांति बनाए रखें- बच्चे को भरपूर पानी पिलाएं- नियमित तापमान चेक करें- डॉक्टर की बात मानें
- क्या न करें- खुद से दवाई न दें- बच्चे को स्कूल न भेजें- दूसरे बच्चों के संपर्क में न आने दें- घरेलू इलाज पर भरोसा न करें वर्तमान स्थिति (2024)अभी (2024 में) भारत में टोमैटो फ्लू के नए बड़े मामले सामने नहीं आए हैं। स्वास्थ्य विभाग सतर्क है और नियमित निगरानी कर रहा है। read more post
निष्कर्ष
टोमैटो फीवर एक ऐसी वायरल बीमारी है जिससे निपटा जा सकता है। यह जानलेवा नहीं है लेकिन सही समय पर डॉक्टर की सलाह और उचित घरेलू देखभाल जरूरी है। माता-पिता को चाहिए कि वे लक्षणों को पहचानें, बच्चे को अलग रखें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें। सही जानकारी और एहतियात के साथ टोमैटो फ्लू को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। मुख्य बात- टोमैटो फीवर एक self-limiting बीमारी है जो मुख्यतः बच्चों को प्रभावित करती है। सही देखभाल, पानी की पूर्ति और अलगाव के साथ इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।