Gaza city की धरती पर आज जो मंजर दिखाई दे रहा है, वह किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल दहला देने वाला है। जो इलाका कभी हरियाली और जिंदगी से भरपूर था, आज वहां भुखमरी की छाया मंडरा रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में अकाल की स्थिति पहली बार आधिकारिक रूप से घोषित की गई है, जो पूरे मध्य पूर्व में अपनी तरह की पहली घटना है।

क्या है गाजा का वर्तमान हाल?
गाजा की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि UN-backed विशेषज्ञों ने इसे “सबसे बुरे हालात” की संज्ञा दी है। यहां लगातार चल रहे संघर्ष, बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन और जरूरी सेवाओं का पूरी तरह ध्वस्त हो जाना इस त्रासदी के मुख्य कारण हैं। आंकड़े बताते हैं कि पांच लाख से अधिक लोग इस समय अकाल की चपेट में हैं, जहां व्यापक भुखमरी, गरीबी और रोकी जा सकने वाली मौतों का सिलसिला जारी है।गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक भुखमरी से मरने वालों की संख्या 271 तक पहुंच गई है, जिसमें 112 बच्चे शामिल हैं। यह आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है। केवल 24 घंटों में 10 लोगों की मौत हो जाना और उससे पहले के दिन 15 लोगों का चले जाना, यह दिखाता है कि स्थिति कितनी तेजी से बिगड़ रही है।
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बच्चों पर सबसे बड़ा असर
इस त्रासदी में सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे हो रहे हैं। गाजा पट्टी में पांच साल से कम उम्र के सभी 320,000 बच्चे तीव्र कुपोषण के जोखिम में हैं। इनमें से हजारों बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित हैं, जो उनकी जान के लिए खतरा बन गया है। यह स्थिति न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए चिंताजनक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर परिणाम लेकर आएगी।लगभग 55,500 गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को तुरंत पोषण सहायता की जरूरत है। ये महिलाएं न केवल अपनी जान की लड़ाई लड़ रही हैं, बल्कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चों का भविष्य भी दांव पर है। कुपोषण के कारण जन्म लेने वाले बच्चों में विकास संबंधी समस्याएं होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति को “मानव निर्मित आपदा” करार दिया है। उन्होंने इसे नैतिक अंतरात्मा पर दाग और पूरी मानवता की असफलता बताया है। गुटेरेस का कहना है कि यह दुःस्वप्न तुरंत समाप्त होना चाहिए और इसके लिए तत्काल और स्थायी मानवीय युद्धविराम की आवश्यकता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ (UNICEF), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने मिलकर तत्काल युद्धविराम और बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग की है। इन संस्थाओं का कहना है कि भूख और कुपोषण से होने वाली मौतों को रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण से गाजा की स्थिति
गाजा में अकाल की घोषणा मध्य पूर्व के इतिहास में पहली बार हुई है। यह क्षेत्र जो कभी भूमध्यसागर के किनारे स्थित एक समृद्ध इलाका हुआ करता था, आज दुनिया के सबसे संकटग्रस्त क्षेत्रों में से एक बन गया है। वर्षों से चले आ रहे संघर्ष, आर्थिक नाकेबंदी और बुनियादी ढांचे के विनाश ने इस स्थिति को जन्म दिया है।IPC (Integrated Food Security Phase Classification) की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी गाजा और गाजा गवर्नरेट में अकाल की स्थिति पहले से ही अनुमानित थी और अब यह वास्तविकता बन गई है। खाद्य असुरक्षा के लिए निर्धारित अकाल की सीमा को पार कर चुके इस इलाके में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
मानवीय सहायता की चुनौतियां
गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती बन गई है। निरंतर चल रहे संघर्ष के कारण सहायता वितरण में भारी बाधाएं आ रही हैं। खाद्य पदार्थ, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने वाले काफिले अक्सर रुक जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। यह स्थिति उन लाखों लोगों के लिए और भी घातक बन गई है जो पहले से ही जीवन-मृत्यु की लड़ाई लड़ रहे हैं।बुनियादी सेवाओं का पूर्ण रूप से ध्वस्त हो जाना एक और गंभीर समस्या है। अस्पताल, स्कूल, पानी की सप्लाई और बिजली की व्यवस्था – सब कुछ बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे न केवल तत्काल स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं, बल्कि दीर्घकालिक विकास भी बाधित हो रहा है।
आगे की राह और समाधान
गाजा की इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने होंगे। सबसे पहले युद्धविराम जरूरी है ताकि मानवीय सहायता बिना किसी बाधा के पहुंच सके। दूसरे, खाद्य आपूर्ति की नियमित व्यवस्था करनी होगी जो लंबे समय तक चल सके।अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस संकट को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी के रूप में देखना होगा। हर दिन की देरी से और लोगों की जान जा रही है, खासकर बच्चों की। तत्काल चिकित्सा सहायता, पोषाहार कार्यक्रम और साफ पानी की व्यवस्था जैसे बुनियादी कदम उठाने होंगे।गाजा में जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ वहां के लोगों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए शर्म की बात है। यह हमें याद दिलाता है कि 21वीं सदी में भी इंसान कितना निर्दयी हो सकता है और कैसे राजनीतिक मतभेद निर्दोष लोगों की जान ले सकते हैं। समय आ गया है कि दुनिया एकजुट होकर इस त्रासदी को रोके और गाजा के लोगों को उनका हक दिलाए –
जीने का हक, खाने का हक, और गरिमा के साथ जीने का हक।